Thursday, March 20, 2025

Peering into Future: Indian Science Fiction, Artificial Intelligence and Society.

The prestigious Ramlal Anand College of Delhi University organised an event on science fiction on 19th March 2025 . Professor Urvashi Kuhad was the organizer of the entire event and also the convener of the discussion session.


The topic of the discussion was "Peering into Future: Indian Science Fiction, Artificial Intelligence and Society"! That is, peeking into the future of the interrelationship between Indian science fiction literature, artificial intelligence and society. It was a panel discussion in which the discussion took place between  Indian science fiction experts. Audience also participated enthusiastically in this discussion in an open session that followed. 




I initiated discussion by introducing the audience to this genre of literature in the language of common understanding. I cleared the common misunderstandings about science fiction. I told that science fiction is not a genre of science but of literature which introduces you to a parallel reality different from your known world.  This is usually the future in which the condition of human society, both at the micro and macro level, is depicted which may emerge due to fast pace of technological changes.



In a way, the science fiction writer also warns people about the dangers caused by technology through the story by making relevant predictions. He is said to possess a "prophetic vision". However, it is not necessary that all his predictions come true. They may or may not come true.



Subsequently, the speakers Sami Ahmad Khan, Jawaharlal Nehru University, Archana Mirajkar, renowned English and Marathi writer and Pragya Gautam, renowned Hindi science fiction writer and Urvashi Kuhad, professor RLM college, Delhi University concluded and also expressed her reservations on artificial intelligence in the perspective of science fiction literature. All the experts then also participated in a discussion organized in the college's radio community center Tarang.

On this occasion, Vigyan Katha Kosh published under the chief editorship of India's renowned science fiction writer Harish Goyal was also unveiled, which is the first ever praiseworthy Indian effort to compile succinctly the entire literature of Hindi science fiction. This will also inspire speakers of other science fiction languages. 



This event has taken another big initiative towards removing the fog surrounding science fiction literature in India.

Live event Broadcast :

(Ubiquitous - Literary Society of Ram Lal Anand College) 

Link for availablilty of the encyclopedia - 
[20/03, 18:18] Arvind Mishra: Indian Science Fiction Encyclopedia (of Hindi Writers) 


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दिनांक 19 मार्च 2025 को दिल्ली में मेरा प्रवास यादगार बन गया। वहां दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कालेज के अंग्रेजी विभाग में यूबीक्युटस लिटेरेरी सोसाईटी द्वारा आयोजित विज्ञान कथा विषयक एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पूरे आयोजन की कर्ता धरता और चर्चा सत्र की संयोजक थीं प्रोफेसर Urvashi Kuhad।

चर्चा का विषय था " Peering into Future : Indian Science Fiction, Artificial Intelligence and Society"! यानि भारतीय विज्ञान कथा साहित्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समाज के अंतर्संबंधों के भविष्य में झांकना। यह एक पैनेल डिस्कशन था जिसमें भारतीय विज्ञान कथा के दिग्गजों के बीच चर्चा हुई और श्रोता दर्शकों ने भी इस चर्चा में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

मैंने चर्चा की शुरुआत करते हुये साहित्य की इस विधा से आम समझ की भाषा में श्रोता - दर्शकों का परिचय कराया। साईंस फिक्शन को लेकर आम गलतफहमियों को दूर किया। बताया कि विज्ञान कथा विज्ञान की नहीं साहित्य की एक विधा है जो आपकी जानी पहचानी अपनी दुनिया से पृथक एक समांतर यथार्थ से परिचय कराती है। यह प्रायः भविष्य होता है जिसमें प्रौद्योगिकी बदलावों से संभावित मनाव समाज, व्यष्टि और समष्टि दोनों स्तरों की दशा दुर्दशा का चित्रण होता है।

एक दृष्टि से विज्ञान कथाकार पूर्वानुमान करके कहानी के माध्यम से लोगों को प्रौद्योगिकी जनित खतरों से आगाह भी करता है। उसका एक "प्रोफेटिक विज़न" होता है। हलांकि कोई जरुरी नहीं कि उसकी सभी भविष्यवाणियां सच ही साबित हों। वे सच हो सकती हैं और नहीं भी।

तदनंतर वक्ताओं Sami Ahmad Khan ,जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, Archana Mirajkar, अंग्रेजी और मराठी की ख्यातिलब्ध साहित्यकार तथा Pragya Gautam, प्रतिष्ठित हिन्दी विज्ञान कथाकार और उर्वशी कुहाड़ ने कृत्रिम बुद्धि को विज्ञान कथा साहित्य के परिप्रेक्ष्य में विवेचित किया। सभी विशेषज्ञों ने तदनंतर कालेज के रेडियो कम्युनिटी सेंटर तरंग में भी नियोजित एक परिचर्चा में भाग लिया।

इस अवसर पर भारत के शीर्षस्थ विज्ञान कथाकार Harish Goyal जी के मुख्य संपादन में प्रकाशित विज्ञान कथा कोष का भी अनावरण किया गया जो हिन्दी विज्ञान कथा के समग्र साहित्य को संकलित करने का एक पहला स्तुत्य भारतीय प्रयास है। जिससे अन्य विज्ञान कथा के भाषा भाषियों को भी प्रेरणा मिलेगी। 

इस आयोजन ने भारत में विज्ञान कथा साहित्य को लेकर छाये कुहांसे को हटाने की दिशा में एक और बड़ी पहल है। 
Arvind Mishra 
Secretary, Indian Science Fiction Writers'  Association 

7 comments:

  1. विज्ञान गल्प साहित्य की विधा तो है लेकिन यह किसी वैज्ञानिक सिद्धांत के इर्द-गिर्द ही बुनी जाती है .वास्तव मे यह विज्ञान के सिद्धांतों के व्यावहारिक धरातल पर लाने का साहित्य है.

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    1. जी बिल्कुल सही कहा आपने।

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  2. रामधनी द्विवेदी

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  3. बहुत बहुत बधाई सर । इस Encyclopaedia की कॉपी कहॉं मिलेगी ?

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    1. बहुत आभार, आमेजन पर उपलब्ध है। लिंक पोस्ट में है।

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